शैतान कौन है और वह कैसे काम करता है? | Who is Satan or Lucifer ?

शैतान कौन है और वह कैसे काम करता है?






शैतान कौन है?

शैतान के अस्तित्व और उसके कार्यों के सबूत बाइबल में मिलते हैं। यदि आप उत्पत्ति की किताब की पहली पंक्ति पढ़ें, तो उसमें लिखा है:

"आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की।"

यहाँ "आकाश" का अर्थ स्वर्ग और परमेश्वर का स्थान है। वहीं पर परमेश्वर ने फरिश्तों को बनाया और उन पर नज़र रखने के लिए "परमेश्वर के पुत्रों" को बनाया, जिन्हें बाइबल में "morning stars" कहा गया है।

बाइबल में अयूब की पुस्तक 38:4-7 में लिखा है:

"4 जब मैंने पृथ्वी की नींव डाली, तब तू कहाँ था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे। 5 उसकी नाप किसने ठहराई, क्या तू जानता है? उस पर किसने सूत खींचा? 6 उसकी नींव कौन सी वस्तु पर रखी गई, या किसने उसके कोने का पत्थर बैठाया? 7 जब भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे।"

यहाँ पर परमेश्वर स्वयं अयूब से कहते हैं कि morning stars, अर्थात परमेश्वर के पुत्र, एक साथ परमेश्वर की आराधना करते थे। इन्हीं पुत्रों में से एक था, जिसका नाम बाइबल में "लुसिफर" बताया गया है।

लुसिफर का परिचय

यशायाह नबी की पुस्तक 14:12 में लिखा है:

"हे भोर के चमकनेवाले तारे, तू कैसे आकाश से गिर पड़ा है? तू जो जाति-जाति को हरा देता था, तू अब कैसे काटकर भूमि पर गिराया गया है?"

हिब्रू भाषा की बाइबल में यहाँ "morning star" या "Light-Bringer" लिखा गया है, जिसे King James Version बाइबल में "Lucifer" कहा गया है। यह नाम "Lucent" शब्द से आया है, जिसका अर्थ "morning star" या "Light-Bringer" होता है।

इतिहासिक किताबों में लुसिफर का वर्णन मिलता है कि वह अत्यंत सुंदर, आकर्षक और संगीत में निपुण था। उसके गीत और संगीत से पूरे स्वर्ग में आनंद छा जाता था। लेकिन, अपनी सुंदरता और श्रेष्ठता के कारण, लुसिफर को घमंड हो गया। उसने परमेश्वर से बगावत की और खुद को पूज्य बनाने की इच्छा की।

लुसिफर की बगावत और पतन

यहेजकेल 28:12-17 में लिखा है:

"12 तू तो उत्तम से भी उत्तम है; तू बुद्धि से भरपूर और सर्वांग सुन्दर है। 13 तू परमेश्वर की अदन नामक बारी में था; तेरे पास आभूषण, माणिक्य, पुखराज, हीरा, फीरोजा, सुलैमानी मणि, यशब, नीलमणि, मरकत, और लाल सब भाँति के मणिऔर सोने के पहरावे थे; तेरे डफ और बाँसुलियाँ तुझी में बनाई गई थीं; जिस दिन तू सिरजा गया था; उस दिन वे भी तैयार की गई थीं। 14 तू सुरक्षा करनेवाला अभिषिक्त करूब था, मैंने तुझे ऐसा ठहराया कि तू परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर रहता था; तू आग सरीखे चमकनेवाले मणियों के बीच चलता फिरता था। 15 जिस दिन से तू सिरजा गया, और जिस दिन तक तुझ में कुटिलता न पाई गई, उस समय तक तू अपनी सारी चालचलन में निर्दोष रहा। 16 परन्तु लेन-देन की बहुतायत के कारण तू उपद्रव से भरकर पापी हो गया; इसी से मैंने तुझे अपवित्र जानकर परमेश्वर के पर्वत पर से उतारा, और हे सुरक्षा करनेवाले करूब मैंने तुझे आग सरीखे चमकनेवाले मणियों के बीच से नाश किया है। 17 सुन्दरता के कारण तेरा मन फूल उठा था; और वैभव के कारण तेरी बुद्धि बिगड़ गई थी। मैंने तुझे भूमि पर पटक दिया; और राजाओं के सामने तुझे रखा कि वे तुझको देखें।"

शैतान और उसके साथी

लुसिफर, जिसे अब शैतान के नाम से जाना जाता है, अपनी बगावत के कारण स्वर्ग से गिरा दिया गया। उसके साथ एक तिहाई फरिश्ते भी गिरा दिए गए, जिन्हें आज हम दानव, भूत, पिशाच, आदि के नाम से जानते हैं। प्रकाशित वाक्य 12:4 में लिखा है:

"और उसकी पूँछ ने आकाश के तारों की एक तिहाई को खींचकर पृथ्वी पर डाल दिया।"

ये गिरे हुए फरिश्ते शैतान के साथी बन गए और आज भी बुराई फैलाने का कार्य कर रहे हैं।

शैतान का उद्देश्य

शैतान का मुख्य उद्देश्य परमेश्वर के हर प्रिय सृजन को नाश करना है, विशेष रूप से इंसानों को। वह परमेश्वर से नफरत करता है और इंसानों को परमेश्वर के संपर्क से तोड़ने के लिए हरसंभव प्रयास करता है। हत्या, बलात्कार, युद्ध, और अन्य बुराइयों के पीछे शैतान का ही हाथ होता है।

शैतान को नष्ट क्यों नहीं किया गया?

शैतान को नष्ट नहीं किया गया क्योंकि वह अमर है। लेकिन, बाइबल में लिखा है कि अंतिम समय में शैतान और उसके साथियों को अनंतकाल के लिए आग की झील में डाल दिया जाएगा। प्रकाशित वाक्य 20:7-10 में लिखा है:

"7 जब हजार वर्ष पूरे हो चुकेंगे तो शैतान कैद से छोड़ दिया जाएगा। 8 और उन जातियों को जो पृथ्वी के चारों ओर होंगी, अर्थात् गोग और मागोग को जिनकी गिनती समुद्र की रेत के बराबर होगी, भरमाकर लड़ाई के लिये इकट्ठा करने को निकलेगा। 9 और वे सारी पृथ्वी पर फैल जाएँगी और पवित्र लोगों की छावनी और प्रिय नगर को घेर लेंगी और आग स्वर्ग से उतरकर उन्हें भस्म करेगी। 10 और उनका भरमानेवाला शैतान आग और गन्धक की उस झील में, जिसमें वह पशु और झूठा भविष्यद्वक्ता भी होगा, डाल दिया जाएगा; और वे रात-दिन युगानुयुग पीड़ा में तड़पते रहेंगे।"

शैतान कैसे काम करता है?

शैतान का मुख्य उद्देश्य इंसानों को परमेश्वर से दूर करना है। वह इंसानों को नास्तिक बनाने की कोशिश करता है और विज्ञान, टेक्नोलॉजी, और तर्कों का उपयोग करके उन्हें भ्रमित करता है। यदि कोई नास्तिक नहीं बनता, तो शैतान उसे फर्जी देवताओं और रीति-रिवाजों में उलझा देता है ताकि उसका संपर्क सच्चे परमेश्वर से टूट जाए।


शैतान का उद्देश्य और उसकी चालें
शैतान परमेश्वर से घृणा करता है और उसकी प्रिय रचना, मनुष्य, को नाश करने का प्रयास करता है। वह हर उस चीज़ को नष्ट करना चाहता है, जिसे परमेश्वर प्यार करते हैं।

शैतान का मुख्य उद्देश्य इंसानों को परमेश्वर से दूर करना और उन्हें पाप के रास्ते पर ले जाना है।

  1. मनुष्य को नास्तिक बनाना:
    शैतान विज्ञान और तकनीक का सहारा लेकर इंसानों को नास्तिक बनाने की कोशिश करता है। वह यह यकीन दिलाता है कि परमेश्वर का अस्तित्व नहीं है और इंसान खुद "सर्वशक्तिमान" बन सकता है।

  2. फर्जी धार्मिकता में उलझाना:
    यदि इंसान नास्तिक नहीं बन पाता, तो शैतान उसे फर्जी धार्मिकता में फंसा देता है ताकि वह सच्चे परमेश्वर तक न पहुंचे।

  3. आत्म-केंद्रित बनाना:
    शैतान यह विचार देता है कि खुद को पा लेना ही मोक्ष है। यह इंसान को घमंडी और तर्कहीन बना देता है, जिससे वह परमेश्वर से दूर हो जाता है।


निष्कर्ष

शैतान का अंत तय है, लेकिन वह अपने साथ अधिक से अधिक आत्माओं को नरक की आग में ले जाना चाहता है। इसलिए, हमें अपने परमेश्वर के साथ संपर्क बनाए रखना चाहिए। जैसा कि युहना 3:16 में लिखा है:

"क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।"

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May God bless you and your family! Stay tuned and stay blessed!



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